Monthly Archives: April 2016

हरामी और बेवकूफ: एक विचार

  इंसान सिर्फ दो नसल के होते है. एक होते है हरामी और दुसरे बेवकूफ. और ये सारा खेल इन्ही दोनो  के बीच का है. गैंग्स ऑफ़ वासेपुर का ये डायलाग मेरा सबसे फेवरेट डायलाग है. ये लाइन इतनी गहरी … Continue reading

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दिल्ली के ढाई साल ले कर

“तुम्हे रात में नींद क्यों नहीं आती है?” “पता नहीं” “कब लौटे हो ऑफिस से?” “अभी आधे घंटे पहले.” “खाना खाए?” “हाँ, खा लिया.” “मुझसे नहीं पूछोगे की नीतू, खाना खाई की नहीं? “हम्म” “हम्म क्या?” “मुझे पता है कि … Continue reading

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कम्बल का कवर

  उन दिनों हर रात अजीब ही होती थी. मगर वो रात ज्यादा अजीब थी. थक हारकर अपने रूम पर कभी एक तो कभी दो बजे रात में पहुचता था. कुछ भी नया करने को नहीं बचा था. वही रात … Continue reading

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