Monthly Archives: November 2016

इस वक्त मोचीराम नहीं पढ़ा तो क्या पढे

ये कविता सुदामा पाण्डेय ‘धूमिल’ की कविता है. हमारी नहीं. मनाते ये हैं की काश हम कुछ ऐसा लिख पाते. लेकिन इस कविता को लिख पाना जीवन को एक पल में जी लेने जैसा होगा. मैंने धूमिल को पढना तीन … Continue reading

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